हनुमान जी · Hanuman ji

Traditionalपारंपरिक

हनुमान आरती — Hanuman Aarti

The aarti of Hanuman ji, sung with a lamp right after the Hanuman Chalisa. Its refrain, "Aarti kijai Hanuman lala ki", returns after every stanza.हनुमान जी की आरती, जो हनुमान चालीसा के बाद दीपक के साथ गाई जाती है। हर पद के बाद इसकी टेक "आरती कीजै हनुमान लला की" दोहराई जाती है।

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देवनागरीEnglishଓଡ଼ିଆ

Refrainटेक

ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ।ଦୁଷ୍ଟ ଦଲନ ରଘୁନାଥ କଲା କୀ॥

आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

Stanza 1 of 6पद 1 (6 में से)

ଜାକେ ବଲ ସେ ଗିରିବର କାଂପେ।ରୋଗ ଦୋଷ ଜାକେ ନିକଟ ନ ଝାଂକେ॥ଅଂଜନି ପୁତ୍ର ମହା ବଲଦାଈ।ସନ୍ତନ କେ ପ୍ରଭୁ ସଦା ସହାଈ॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।रोग दोष जाके निकट न झांके॥अंजनि पुत्र महा बलदाई।सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

Refrain again: फिर टेक: ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ …

Stanza 2 of 6पद 2 (6 में से)

ଦେ ବୀରା ରଘୁନାଥ ପଠାଏ।ଲଂକା ଜାରି ସିୟା ସୁଧି ଲାଏ॥ଲଂକା ସୋ କୋଟ ସମୁଦ୍ର-ସୀ ଖାଈ।ଜାତ ପବନସୁତ ବାର ନ ଲାଈ॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।लंका जारि सिया सुधि लाए॥लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई॥

Refrain again: फिर टेक: ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ …

Stanza 3 of 6पद 3 (6 में से)

ଲଂକା ଜାରି ଅସୁର ସଂହାରେ।ସିୟାରାମଜୀ କେ କାଜ ସବାରେ॥ଲକ୍ଷ୍ମଣ ମୂର୍ଛିତ ପଡ଼େ ସକାରେ।ଆନି ସଂଜୀବନ ପ୍ରାଣ ଉବାରେ॥

लंका जारि असुर संहारे।सियारामजी के काज सवारे॥लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे॥

Refrain again: फिर टेक: ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ …

Stanza 4 of 6पद 4 (6 में से)

ପୈଠି ପାତାଲ ତୋରି ଜମ-କାରେ।ଅହିରାବଣ କୀ ଭୁଜା ଉଖାରେ॥ବାଏଂ ଭୁଜା ଅସୁରଦଲ ମାରେ।ଦାହିନେ ଭୁଜା ସଂତଜନ ତାରେ॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।अहिरावण की भुजा उखारे॥बाएं भुजा असुरदल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे॥

Refrain again: फिर टेक: ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ …

Stanza 5 of 6पद 5 (6 में से)

ସୁର ନର ମୁନି ଆରତୀ ଉତାରେଂ।ଜୟ ଜୟ ଜୟ ହନୁମାନ ଉଚାରେଂ॥କଂଚନ ଥାର କପୂର ଲୌ ଛାଈ।ଆରତୀ କରତ ଅଂଜନା ମାଈ॥

सुर नर मुनि आरती उतारें।जय जय जय हनुमान उचारें॥कंचन थार कपूर लौ छाई।आरती करत अंजना माई॥

Refrain again: फिर टेक: ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ …

Stanza 6 of 6पद 6 (6 में से)

ଜୋ ହନୁମାନଜୀ କୀ ଆରତୀ ଗାବେ।ବସି ବୈକୁଣ୍ଠ ପରମ ପଦ ପାବେ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

Refrain again: फिर टेक: ଆରତୀ କୀଜୈ ହନୁମାନ ଲଲା କୀ …